• TRAVELLER PACHU SHETTY

रुख़सत गांव से शहर का ....(PART 02)

Updated: May 25

"जो आसानी से मिल जाता है वो हमेशा तक नहीं रहता, जो हमेशा तक रहता है वो आसानी से नहीं मिलता।"-(संग्रह-गूगल )


सपनों की नगरी "मुंबई" में कुछ पल :

मै अपने मामा के साथ 2010 में सपनों नगरी मुंबई में आया। ऐसा बोला जाता है की मुंबई में लोग अपने सपने लेके पुरे करते है। लेकिन यहाँ सपने पुरे करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती हे ये बात सिर्फ और सिर्फ जो सपने लेके मुंबई आया है उसको ही पता है। मुंबई में मेरे बहुत सारे रिश्तेदार है लेकिन मै अपने छोटे मामा मुंबई के वसई में रहते थे,उनका वहां होटल (बियर बार) था। जैसे की मैंने पहले ही बताया था की हम शेट्टी है हमारा बिज़नेस ही होटल्स का होता हे वैसे ही मामा का भी बियर बार था। मै मुंबई आते ही पहले थोड़ा मुंबई को जानने में लग गया। थोड़ा मुंबई घूम लिया कुछ रिश्तेदारों के घर जाके उनको मिल लिया। कुछ वक्त मामा के बियर बार में छोटा मोठा काम करके मदत करता था। पहली बार मुंबई के घाटकोपर में एक ANIMATION STUDIO है "PRASAD MULTIMEDIA" वहां जाके अपना DEMOREEL दिखाया,कुछ दिन में DEMOREEL देख के बता देंगे बोले। लेकिन यहाँ भी मेरा नसीब बहुत बुरा था। वैसे भी अच्छे काम में कुछ ना कुछ मुसीबत बीच आ ही जाती है। अब मैंने ANIMATION पढ़ा था LOW LEVEL INSTITUTE में मेरे ANIMATION DEMOREEL QUALITY भी LOW LEVEL ही होगा ना। इसके अलावा एक दो जगह भी DEMOREEL भेजा था ,लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया था। मै भी कुछ दिन तक मामा के बियर बार में काम करता रहा लेकिन यही नहीं करना है, कुछ आगे भी बढ़ना है मुझे। तो वसई में ही ARENA ANIMATION INSTITUTE था,हर बार घर से बियर बार जाते आते वक्त सिर्फ देखता था,कभी वह जाने की हिम्मत नहीं की क्यों की मुझे पता है पहले ही बंगलोर में अनुभव हो चूका है। बहुत दिन के बाद एक बार हिम्मत जुटाकर चला ही गया पूछताछ करने के लिए। पहले मैंने अपनी जो हालत थे पहले उनको बताया , मैंने बोला उनको की मुझे 2-3 साल तक पढ़के पूरा SOFTWERE नहीं सीखना मुझे सिर्फ एक SOFTWERE सीखना है जिससे मै ANIMATION पूरी करू। तो उन्होंने सुझाव दिया की आप सिर्फ MAYA SOFTWERE सीखो एक साल का कोर्स करो ये पूरा आपका लगभग Rs.70000/- में हो जायेगा। वहां से admission के लिए जो Documents चाहिए वो सारे लेकर बियर बार पंहुचा और मामा से बात किया मामा थोड़े हिचकिचा रहे थे पैसों के मामले में, मै समज गया,मैंने कहा आप मुझे बियर बार में काम पे रख लो मुझे जो पगार देनेवाले हो उससे अपना animation का फीस भर दूंगा। मामा मान गये। और मैंने ARENA ANIMATION जाके ADMISSION ले लिया। उस वक्त दिनचरी ऐसी थी की सुबह उठके होटल से बाज़ार जाके होटल के लिए हर दिन के लिए जो सामान चाहिए वो लेके आना, फिर दोपहर तक होटल में काम करता था। फिर दोपहर को 3 बजे होटल बंद होता था उस वक्त खाना सब खाके एनीमेशन पढ़ने जाता था , मेरा INSTITUTE में वक्त था 4 से 5 का, तो अपनी पढ़ाई पूरी करके वापिस होटल लौट आता था। वैसे भी होटल शाम को 6 बजे वापिस खुलता है। तब वापिस में होटल के काम पे लग जाता था । फिर रात के 12-01 बजे तक काम करता था। कुछ वक्त तक ऐसे ही चल रहा था। मेरी ANIMATION की पढ़ाई भी काफी अच्छे तरीके से चल रही थी।

3D MODELING करते हुए


बहुत सारे दोस्त बन गए थे मेरे वहां, और कभी बाहर घूमने जाते थे ,बहुत मज़े भी कर रहे थे हम। मतलब कहने जाये तो गांव के बाद असली मजे तो मैंने मुंबई ANIMATION पढ़ाई करने के वक्त किया है। जैसे मुंबई में हाजी अली दर्गा,अष्टविनायक मंदिर, तुंगारेश्वर मंदिर ऐसे और कही सारे जगह घूम लिए थे मैंने।


दोस्तों के साथ तुंगारेश्वर ट्रेक की कुछ यादें


मेरे कुछ खास दोस्त


सब कुछ ठीक चल रहा था। एक साल के बाद मेरा Animation का कोर्स पूरा हो गया। इसी बीच में एरीना एनीमेशन इंस्टिट्यूट का हर साल एक फंक्शन होता है "CREATIVE MINDS" जिसके लिए हमें अपने अपने टैलेंट को सामने रखना होता है। तो मैंने दो ANIMATION SEQUENCE बनाया था। उसी वक़्त मुंबई में "2nd MUMBAI SHORT INTERNATIONAL FILM FESTIVAL-2013" होनेवाला था। तो मैंने, मेरे दोस्त दर्शन ने पार्ट लेने का सोचा इस फंक्शन में,लेकिन इसके लिए हमें एक Short Movie बनाना था कुछ और दोस्तो को मिलकर एक टीम बनाकर "CHEWING GUM" नाम का एक short movie का काम शुरू किय। लगभग 2 महीने के बाद हमारी SHORT FILM तैयार हो गयी।

CHEWING GUM 3D ANIMATION SHORT FILM के POSTER के साथ


असल में ये फिल्म एरीना एनीमेशन के फंक्शन के लिए बनाया था। वह तो हमने जो होगा देखा जायेगा बोलके international film festival में भी डाल दिया। पहले अरीना एनीमेशन का फंक्शन पूरा हो गया और उसमे हमारा "CHEWING GUM" SHORT FILM का सिलेक्शन नहीं हुआ। लेकिन कुछ दिनों के बाद हमें मैल आया की हमने जो "CHEWING GUM" SHORT FILM मुंबई में जो "2nd MUMBAI SHORT INTERNATIONAL FILM FESTIVAL-2013" होनेवाला था उसमे NOMINATE हो गया। उस वक़्त मुझे,दर्शन,हमारी पूरी टीम ,अरीना अनिमेशन अकाडेमी सब लोग खुश हो गए। INTERNATIONALE LEVEL पे हमारी SHORT MOVIE NOMINATE होना कोई छोटी बात नहीं थी। जिस दिन इसका फंक्शन मुंबई में हुआ था तब फंक्शन पे मै और दर्शन गए थे।

NOMINATION CERTIFICATE के साथ मै और दर्शन


इस फंक्शन के बाद हर दिन के जैसे animation studies में लगे पड़े थे। कुछ दिनों के बाद मुझे गोरेगांव के जो मुंबई की सबसे बड़ी फिल्मसिटी "दादा साहेब फाल्के फिल्मसिटी" में फिल्म डायरेक्टर केतन मेहता जी का " मुक्ता आर्ट्स " से मुझे 3D animator के पोस्ट के लिए काम का ऑफर मिला।में बहुत खुश था की मैंने ज़िन्दगी में जो मुझे होना था ,वो में होनेवाला था। लेकिन मेरी ज़िन्दगी भी ऐसी थी की मै भूल गया था की मेरी ज़िन्दगी में तो बिना दिक्कत के काम पूरा नहीं होता। अब दिक्कत ये थी की वहाँ अगर मुझे जॉब करना है तो मुझे लगभग Rs. 60000/- फीस भरनी थीऔर वो मुझे 6 महीने का ट्रेनिंग देंगे और इन 6 महीनो में मुझे थोड़ा मतलब हर महीने मुझे 5000 मिलता रहेगा 6 महीने के बाद मेरी जॉब पक्की की हो जाएगी वो भी Rs.20000/- सैलरी के साथ। मैंने अपने दोस्तों से अम्मा से थोड़े पैसे जमा करके फीस भरके ट्रेनिंग लेना शुरू किया । अच्छा लग रहा था ,कुछ अलग,कुछ नया सिखने को मिल जाता था। 6 महीने के बाद मेरी जॉब पक्की हो गयी। मुझे काम करना था आजकल बच्चे जो कार्टून देखते है "मोटू -पत्लू", "ताशी", "वीरू" जैसे बहुत से कार्टून फिल्म्स में काम करता था।

नाईट ड्यूटी में काम का मज़ा लेते मै


काम अच्छे से चल रहा था , लेकिन क्या है ना दुनिया में हर चीज़ का एक वक़्त होता है जैसे मेरे जॉब पक्का होने के 6 महीने के बाद ANIMATION INDRUSTRY बहुत ही नीचे चला गया। मेरी सैलरी भी बहुत दिनों तक आता नहीं था। मैंने बहुत सोचा लेकिन आखिरकार मैंने जॉब छोड़ने फैसला लिया और मैंने जॉब छोड़ दिया। उसी वक़्त गोरेगांव के एक एक और स्टूडियो में एक ANIMATION PROJECT के लिए FREELANCER 3D ANIMATOR की जरुरत थी। जब बात की तो वह मेरी वापिस जॉब लग गयी। पैसे कम मिलते थे लेकिन मेरी आदत तो सिखने की है मेरा पूरा ध्यान सिखने पे था। 7 -8 महीने तक ये काम अच्छा चला, PROJECT ख़तम होते ही दूसरा PROJECT उनके पास आया नहीं हमें घर भेज दिया और बोले अगर काम आया तो बुला लेंगे। लेकिन बहुत वक़्त गुजरने के बाद न बुलाने पे मै अपने गांव मंगलुरू चला गया। एक दो महीने वह निकालने के बाद मै वापिस मुंबई आ गया। लेकिन काम के बारे में कुछ अता पता नहीं था। लेकिन कमाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा इसलिए एक दोस्त ने CALL CENTER में काम का सुझाव दिया ,सैलरी थी Rs.8000/- मैंने सोचा की कही से तो शुरुवात करनी पड़ेगी इसलिए मैंने उसी काम को अपना लिया।


To Be Continued.......



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